17, Aug 2026
माँ के नाम पौधे लगाने के साथ 51 पौधों का संकल्प, विकास कुंज में हरियाली अभियान को मिली जनभागीदारी
“एक पौधा सिर्फ हरियाली नहीं, किसी की स्मृति और आने वाली पीढ़ियों के लिए उम्मीद भी हो सकता है।” इसी भाव के साथ डॉ. क्षमा धोपड़कर फाउंडेशन द्वारा नर्मदा मिशन के तहत चलाए जा रहे ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत 16 अगस्त को विकास कुंज, मंदिर के पास, शाहपुरा पहाड़ी की तलहटी, वार्ड 51 में पौधारोपण किया गया। 108 दिनों तक प्रतिदिन 11 पौधे लगाने के संकल्प के तहत चल रही इस मुहिम में स्थानीय नागरिकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

परम पूज्य अवधूत श्री दादागुरु भगवान के पावन आशीर्वाद से गुरु वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इस दौरान गुरु भक्ति, सेवा और प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया गया। आयोजन का उद्देश्य पौधारोपण को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए लोगों को पौधों की देखभाल और संरक्षण से जोड़ना रहा।

माताओं की स्मृति में लगाए पौधे

कार्यक्रम में कॉलोनीवासियों ने अपनी माताओं के सम्मान और स्मृति में पौधे लगाए। वार्ड पार्षद भगवत सिंह रघुवंशी ने अपनी माता श्रीमती गुलाब देवी के नाम पौधा लगाया। इसके साथ ही सुरेश बाथम, कॉलोनी अध्यक्ष संतमन‍ि शर्मा, गौतम कुमार पांडेय, प्रणय गुप्ता, केदार देशपांडे, लव पुरोहित, अभिजीत मिश्रा, नयन सिंह, अमित तिवारी, भूपेंद्र सिंह और अमित यादव ने भी अपनी माताओं के नाम पौधारोपण किया।

हर हेल्थ हॉस्पिटल की ओर से रामेश्वर रघुवंशी और चंद्र प्रकाश ने भी अपनी माताओं के नाम पौधे लगाए। कार्यक्रम में दीपक शर्मा ने भी सहभागिता की।

51 पौधे लगाने का सामूहिक संकल्प

इस आयोजन की खास बात यह रही कि निर्धारित पौधारोपण के अलावा कॉलोनीवासियों ने 11 अतिरिक्त पौधे लगाए। साथ ही सभी ने मिलकर इस वर्षा ऋतु में कुल 51 पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया। इससे अभियान को सामुदायिक पहल का स्वरूप मिला।

डॉ. क्षमा धोपड़कर फाउंडेशन का प्रयास है कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से शहर के स्कूलों, कॉलोनियों और स्थानीय समुदायों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा जाए। नर्मदा मिशन के तहत चल रहे इस 108 दिवसीय अभियान में अलग-अलग स्थानों पर जाकर पौधारोपण के साथ स्थानीय लोगों को भी जिम्मेदारी दी जा रही है।

माँ के नाम लगाया गया पौधा आने वाले वर्षों में एक पेड़ बनेगा। उसकी छांव, हरियाली और प्राणवायु उस भावना को जीवित रखेगी, जिसके साथ उसे लगाया गया था। यही इस अभियान का मूल संदेश है—माँ का सम्मान केवल शब्दों में नहीं, बल्कि प्रकृति की रक्षा के संकल्प में भी हो।

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