बारिश की बूंदों के साथ हर दिन खिल रहा नया संकल्प, ‘माँ के नाम’ लग रहे पौधे
“प्रकृति से बड़ा कोई उपहार नहीं और इसे सहेजने से बड़ा कोई संकल्प नहीं।” इसी भावना के साथ नर्मदा मिशन के तहत ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान 17 जुलाई से भोपाल में शुरू हुआ है। अभियान के तहत 108 दिनों तक लगातार पौधारोपण करने का संकल्प लिया गया है, जिसमें प्रतिदिन 11 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। शहर में हर दिन एक नई जगह पौधे लगाए जा रहे हैं और इन्हें किसी न किसी माँ के नाम समर्पित किया जा रहा है। बारिश की बूंदों के बीच मिट्टी में उतरते ये पौधे केवल हरियाली बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति और मातृशक्ति के सम्मान का संदेश भी दे रहे हैं।
यह अभियान परम पूज्य अवधूत श्री दादागुरु भगवान के 2100 दिवसीय निराहार साधना संकल्प से प्रेरित है। दादागुरु भगवान के पावन आशीर्वाद से गुरु वंदना के साथ अभियान में प्रकृति संरक्षण और सेवा का संकल्प लिया गया। अभियान की सोच है कि जिस तरह प्रकृति बिना किसी अपेक्षा के हमें जीवन देती है, उसी तरह समाज भी प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाए। ‘माँ’ को प्रकृति के प्रतीक के रूप में देखते हुए हर पौधे को मातृशक्ति के सम्मान से जोड़ा गया है।
हर दिन नई जगह तलाशती है टीम
इस अभियान में हर हेल्थ के स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका है। टीम हर दिन शहर के अलग-अलग इलाकों में पहुंचकर पौधारोपण के लिए स्थान तलाशती है, वहां जगह तैयार करती है और स्थानीय लोगों को साथ लेकर पौधे लगाती है। इसके बाद उस जगह के लोगों को पौधे की देखभाल के लिए प्रेरित किया जाता है। यानी टीम का काम सिर्फ पौधा लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की कोशिश भी है कि लगाए गए पौधे सुरक्षित रहें और आगे चलकर पेड़ बनें।अभियान को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए पार्षदों, स्कूलों, स्थानीय कॉलोनियों और सामाजिक संस्थाओं को भी जोड़ा जा रहा है। स्कूलों में बच्चों को पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल का महत्व समझाया जा रहा है। कई जगह बच्चे अपने परिवार के सदस्यों के नाम पौधे लगाकर इस मुहिम से जुड़ रहे हैं। वहीं कॉलोनियों में स्थानीय लोगों को आसपास की खाली जगहों पर पौधारोपण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
पौधे से भावनात्मक रिश्ता जोड़ने की कोशिश
नर्मदा मिशन की राष्ट्रीय संयोजक डॉ प्रिया भावे चित्तावार बताती हैं कि अभियान की खासियत यह है कि इसमें पौधारोपण को लोगों की भावनाओं से जोड़ा गया है। जब कोई व्यक्ति अपनी माँ के नाम पौधा लगाता है तो वह सिर्फ एक पौधा नहीं लगाता, बल्कि उसके साथ एक भावनात्मक रिश्ता भी बनाता है। यही रिश्ता पौधे की देखभाल की जिम्मेदारी में बदल सकता है। हमारा प्रयास है कि 108 दिनों के दौरान शहर के ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचकर उन्हें इस मुहिम से जोड़ा जाए।हर हेल्थ की टीम रोज नई जगह तलाशने से लेकर पौधारोपण की तैयारी और लोगों को जोड़ने तक लगातार काम कर रही है। आने वाले दिनों में और स्कूलों, कॉलोनियों, सार्वजनिक स्थानों और संस्थानों को अभियान से जोड़ने की योजना है।108 दिनों के बाद इस अभियान की सफलता सिर्फ लगाए गए पौधों की संख्या से नहीं, बल्कि कितने पौधे सुरक्षित रहकर पेड़ बने, कितने लोगों ने उनकी जिम्मेदारी ली और कितने बच्चों ने प्रकृति से रिश्ता बनाया, इससे तय होगी।क्योंकि माँ हमें जीवन देती है और प्रकृति उस जीवन को सांस देती है ,दोनों के सम्मान में लगाया गया एक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे खूबसूरत विरासत हो सकता है।

