16, Aug 2026
माँ के नाम पौधे, गुरु के नाम वृक्ष-मूर्तियां: भोपाल में तीन दिनों तक चला हरियाली और संस्कार का संकल्प
“माँ के नाम लगाया गया एक पौधा सिर्फ हरियाली नहीं, बल्कि प्रेम, स्मृति और आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़ी गई विरासत है।” इसी भावना के साथ भोपाल में डॉ. क्षमा धोपड़कर फाउंडेशन द्वारा नर्मदा मिशन के तहत चलाए जा रहे ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान ने तीन दिनों में शहर के अलग-अलग हिस्सों में पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का संदेश दिया। 13 से 15 अगस्त तक सेज यूनिवर्सिटी, वार्ड 29 नेहरू नगर और भदभदा विश्राम घाट में हुए आयोजनों में विद्यार्थियों, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, चिकित्सकों और विभिन्न संस्थाओं ने पौधारोपण कर इस संकल्प को आगे बढ़ाया।

सेज यूनिवर्सिटी में युवाओं ने लिया हरित भविष्य का संकल्प

13 अगस्त को सेज यूनिवर्सिटी, भोपाल में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के चांसलर संजीव अग्रवाल, सुधीर शर्मा, डॉ. अनिल बीसेन, डॉ. नीरज उपमन्यु और मधु चौधरी सहित अन्य सहभागियों ने पौधे लगाए। इस दौरान अभियान के 108 दिनों के संकल्प और प्रतिदिन 11 पौधे लगाने के लक्ष्य को लेकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़ने का संदेश दिया गया।

शैक्षणिक संस्थान में आयोजित इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराना भी रहा। अभियान के तहत लगाए जा रहे पौधों को केवल कार्यक्रम का हिस्सा न मानकर उनकी देखभाल और संरक्षण से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

नेहरू नगर में पौधे बने रिश्तों की निशानी

14 अगस्त को वार्ड 29 कार्यालय, नेहरू नगर में पौधारोपण हुआ। यहां कॉलोनीवासियों और विद्यार्थियों ने अपनी माताओं और माता-पिता के नाम पौधे लगाए। कई विद्यार्थियों ने यह संकल्प भी लिया कि वे स्कूल आते-जाते समय अपने लगाए पौधों की देखभाल करेंगे।

इस पहल की खासियत यही रही कि पौधारोपण को व्यक्तिगत भावनाओं से जोड़ा गया। किसी ने अपनी मां की स्मृति में पौधा लगाया तो किसी ने माता-पिता के सम्मान में। इससे पौधे के साथ एक भावनात्मक रिश्ता भी जुड़ा और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी लेने की भावना मजबूत हुई।

अभियान में हर हेल्थ हॉस्पिटल की टीम की भी लगातार सहभागिता रही है। टीम अलग-अलग स्थानों पर जाकर पौधारोपण के लिए जगह तलाशने, उसे तैयार करने और स्थानीय लोगों को जोड़ने का काम कर रही है। स्कूलों, कॉलेजों, कॉलोनियों, पार्षदों और स्थानीय संस्थाओं को जोड़कर कोशिश की जा रही है कि पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी तय हो।

स्वतंत्रता दिवस पर भदभदा में वृक्ष-मूर्ति स्थापना

15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और हरियाली तीज के अवसर पर भदभदा विश्राम घाट में अभियान का विशेष आयोजन हुआ। यहां पौधारोपण के साथ वृक्ष-मूर्ति स्थापना की गई। कार्यक्रम नर्मदा मिशन, भोपाल मेनोपॉज सोसाइटी, भोपाल ऑब्सटेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी, एमपी नर्सिंग होम एसोसिएशन और इंडियन फर्टिलिटी सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम में भोपाल की प्रथम नागरिक श्रीमती मालती राय, पार्षद श्रीमती आरती अनेजा, पार्षद मोनू श्रीवास्तव, श्री गोविंद गोयल, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सुश्री नेहा बग्गा, भदभदा विश्राम घाट अध्यक्ष श्री अरुण चौधरी, सचिव मंतेश शर्मा और भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन अध्यक्ष श्री जीतेन्द्र धाकड़ सहित गणमान्यजन मौजूद रहे।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में चिकित्सकों और सहभागियों ने अपने माता-पिता एवं परिवार के वरिष्ठजनों की स्मृति और सम्मान में वृक्ष-मूर्तियां समर्पित कीं। हर वृक्ष-मूर्ति के पीछे एक परिवार की कहानी और अपने प्रियजनों के प्रति कृतज्ञता का भाव जुड़ा रहा।

पौधारोपण से आगे, संरक्षण की जिम्मेदारी

अभियान की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि इसे केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रखा गया है। डॉ. क्षमा धोपड़कर फाउंडेशन का प्रयास है कि हर पौधा किसी व्यक्ति, परिवार, स्कूल, कॉलोनी या संस्था से जुड़े और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी तय हो। नर्मदा मिशन के तहत 108 दिनों तक चलने वाली इस मुहिम में हर दिन नई जगह पहुंचकर स्थानीय लोगों को जोड़ा जा रहा है।

यह पहल परम पूज्य अवधूत श्री दादागुरु भगवान के पावन आशीर्वाद और प्रकृति संरक्षण के संदेश से भी जुड़ी है। गुरु वंदना, सेवा और पर्यावरण संरक्षण को अभियान की भावना का हिस्सा बनाया गया है। उद्देश्य है कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी केवल किसी विशेष दिन तक सीमित न रहे, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बने।

तीन दिनों में हुए इन आयोजनों ने एक बात स्पष्ट कर दी—पर्यावरण संरक्षण तब सबसे प्रभावी होता है, जब वह सरकारी या संस्थागत अभियान भर न रहकर लोगों की व्यक्तिगत भावना और जिम्मेदारी बन जाए। मां के नाम लगाया गया पौधा व्यक्ति को उससे जोड़ता है, स्कूल में लगाया गया पौधा बच्चों को जिम्मेदारी सिखाता है और सार्वजनिक स्थान पर लगाया गया पेड़ पूरे समाज को भविष्य की छांव देता है।

आज लगाया गया पौधा भले छोटा हो, लेकिन उसके साथ जुड़ा संकल्प बहुत बड़ा है। यही पौधे आने वाले वर्षों में भोपाल की हरियाली, स्वच्छ हवा और भावनात्मक स्मृतियों का हिस्सा बनेंगे।

डॉ. क्षमा धोपड़कर फाउंडेशन द्वारा पहल
नर्मदा मिशन के तहत — ‘एक पेड़ माँ के नाम’
108 दिनों का संकल्प | प्रतिदिन 11 पौधे

एक पौधा माँ के नाम लगाइए, उसकी देखभाल कीजिए और उसे पेड़ बनते हुए देखिए—क्योंकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इससे खूबसूरत विरासत कोई और नहीं।

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