सिर्फ दिखने वाली नहीं, छिपी गंदगी भी हटाने की पहल
अक्सर हम सफाई करते समय सामने दिखाई देने वाली गंदगी तो हटा देते हैं, लेकिन उन कोनों और हिस्सों को नजरअंदाज कर देते हैं, जहां से गंदगी फैलने की शुरुआत होती है। नतीजा यह होता है कि कुछ समय बाद वही जगह फिर गंदी हो जाती है। स्वच्छता को केवल ऊपर से साफ-सफाई तक सीमित रखने के बजाय इसकी जड़ तक पहुंचने और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने की इसी सोच के साथ डॉ. क्षमा धोड़पकर फाउंडेशन की ओर से इन दिनों विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है।
17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चल रहे ‘स्वच्छता के संकल्प से स्वच्छता के उत्सव तक’ अभियान के तहत शहर के अलग-अलग सार्वजनिक स्थानों पर सफाई की जा रही है। ‘मोदी जी से महात्मा तक स्वच्छता की ओर एक संकल्प—स्वच्छ भारत’ की थीम पर आधारित इस पहल का उद्देश्य स्वच्छता को केवल किसी विशेष दिन का कार्यक्रम न बनाकर रोजमर्रा की आदत और सामूहिक जिम्मेदारी बनाना है।
इसी क्रम में शनिवार सुबह सैर-सपाटा ब्रिज के नीचे वाले हिस्से में सफाई अभियान चलाया गया। सुबह 6:30 बजे शुरू हुए इस अभियान में हेर हेल्थ हॉस्पिटल की टीम ने भी सहयोग किया। ब्रिज के नीचे और उसके आसपास के हिस्सों में जमा कचरे को हटाने पर विशेष ध्यान दिया गया। यहां सड़क किनारे और झाड़ियों के बीच बिखरे प्लास्टिक, बोतलें, कागज और खाने-पीने की पैकिंग जैसी चीजों को एकत्र किया गया। वहीं, जलधारा के किनारे पड़े कचरे को भी हटाया गया, ताकि गंदगी प्राकृतिक परिवेश को प्रभावित न करे। करीब दो घंटे तक चले इस अभियान में टीम ने लगभग 500 मीटर क्षेत्र की सफाई की।
इस पहल के जरिए लोगों को संदेश दिया गया कि स्वच्छता का असली उद्देश्य केवल गंदगी हटाना नहीं, बल्कि उसे दोबारा जमा होने से रोकना भी है। इसके लिए कचरे को निर्धारित स्थान पर डालना, प्लास्टिक का उपयोग कम करना और सार्वजनिक जगहों को अपनी जिम्मेदारी समझना जरूरी है।






