16 दिनों की सफाई, बदला सड़क किनारे का स्वरूप
“जब सफाई को हम अभियान में बदलते हैं, तो परिवर्तन जरूर आता है। यह बदलाव केवल सड़कों पर नहीं, बल्कि लोगों की सोच में भी दिखाई देता है।” यही बदलाव पिछले 16 दिनों में डॉ. क्षमा धोड़पकर फाउंडेशन की ओर से चलाए गए स्वच्छता अभियान में देखने को मिला। ‘मोदी से महात्मा तक’ स्वच्छता संकल्प के तहत वन विहार के चीकू गेट से होटल सयाजी तक पूरे मार्ग पर प्रतिदिन सफाई अभियान चलाया गया।
अभियान के हर दिन टीम के सदस्य सुबह हाथों में दस्ताने और सफाई का सामान लेकर तय मार्ग पर पहुंचते और करीब दो घंटे तक सफाई में जुटे रहते। सड़क किनारे, झाड़ियों, डिवाइडर और ऐसे हिस्सों पर विशेष ध्यान दिया गया, जहां आमतौर पर कचरा जमा रहता है। इन 16 दिनों में टीम ने प्रतिदिन करीब 20 से 25 किलो कचरा एकत्र किया। इसमें प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिथीन, डिस्पोजेबल गिलास-प्लेट, चिप्स और बिस्किट के रैपर, कागज, खाने-पीने की पैकिंग, थर्माकोल और अन्य कचरा शामिल रहा। कई जगह झाड़ियों के बीच और सड़क किनारे जमा पुराना कचरा भी हटाया गया।
अभियान के जरिए केवल सफाई करने के बजाय लोगों को सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने और कचरा दोबारा जमा न होने देने का संदेश दिया गया। लगातार 16 दिनों तक एक ही मार्ग पर सफाई करने से कई स्थानों का स्वरूप बदला हुआ नजर आया। टीम का प्रयास रहा कि सफाई के साथ नागरिकों में भी अपने आसपास के स्थानों को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी का भाव विकसित हो।
गांधी जयंती के अवसर पर शुक्रवार, 2 अक्टूबर को होटल सयाजी के पास अभियान का समापन किया गया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. राघवेंद्र शर्मा अपनी टीम के साथ शामिल हुए। करीब दो घंटे चले सफाई अभियान में उन्होंने भी टीम के सदस्यों के साथ हाथों में दस्ताने पहनकर कचरा उठाया और श्रमदान किया। सभी ने मिलकर सड़क किनारे और आसपास के हिस्सों से कचरा एकत्र किया।
अभियान ने यह संदेश दिया कि स्वच्छता केवल किसी एक दिन या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की रोज की जिम्मेदारी है। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव से ही शहर को लंबे समय तक स्वच्छ रखा जा सकता है।












