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1, Oct 2026
सफाई कुछ दिनों की नहीं, हर दिन की जिम्मेदारी

है थाम लिया हमने सूरज से ढलना है, सपनों को देनी है नई उड़ान…” इसी जज्बे और जोश के साथ डॉ. क्षमा धोड़पकर फाउंडेशन की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से गांधी जयंती तक स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य केवल कुछ दिनों तक सफाई करना या सार्वजनिक स्थानों से कचरा हटाना नहीं, बल्कि स्वच्छता को रोजमर्रा की जिम्मेदारी और आदत का हिस्सा बनाना है।

अभियान के जरिए खासतौर पर युवाओं और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, क्योंकि आज के युवा ही आने वाले समय में शहर और समाज की दिशा तय करेंगे। फाउंडेशन का मानना है कि यदि बचपन और युवावस्था से ही स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित हो, तो इसके परिणाम लंबे समय तक दिखाई दे सकते हैं।

अक्सर हम अपने घर और आसपास की सफाई को लेकर सजग रहते हैं, लेकिन सार्वजनिक स्थानों, सड़क किनारे, पार्कों और उन कोनों को नजरअंदाज कर देते हैं, जहां से गंदगी फैलने की शुरुआत होती है। अभियान इसी सोच में बदलाव लाने पर जोर दे रहा है। सफाई केवल सफाईकर्मियों या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।

अभियान से जुड़े लोग शहर के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचकर सफाई के साथ लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक कर रहे हैं। बच्चों और युवाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है, ताकि वे केवल अभियान का हिस्सा न बनें, बल्कि अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने के संदेश को आगे भी पहुंचाएं।

फाउंडेशन की पहल का संदेश साफ है—स्वच्छ शहर केवल एक अभियान से नहीं बनता। इसके लिए हर दिन छोटी-छोटी जिम्मेदारियां निभानी होंगी। जब नागरिक सार्वजनिक स्थानों को भी अपने घर की तरह साफ रखने की आदत विकसित करेंगे, तभी स्वच्छता एक अभियान से आगे बढ़कर जीवनशैली बन सकेगी।

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