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1, Oct 2026
जब शहर सो रहा होता है, तब सफाई में जुटी होती है टीम

जब हल्की-हल्की धुंध के बीच शहर सो रहा होता है, तब डॉ. क्षमा धोड़पकर फाउंडेशन की टीम हाथों में दस्ताने और सफाई का सामान लेकर शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर निकल पड़ती है। सूरज की पहली किरण के साथ जब घरों की खिड़कियों से रोशनी भीतर पहुंचने लगती है, तब तक टीम कई जगहों की सफाई कर चुकी होती है।17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान के तहत फाउंडेशन की टीम सुबह-सुबह शहर के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचकर सफाई कर रही है। इस दौरान केवल दिखाई देने वाली गंदगी ही नहीं, बल्कि सड़क किनारे, कोनों और सार्वजनिक स्थानों पर जमा कचरे को भी हटाया जा रहा है। एक अभियान के दौरान करीब 25 से 30 किलो तक कचरा एकत्रित किया गया।सुबह के समय जब ज्यादातर लोग अपने घरों में दिन की शुरुआत कर रहे होते हैं, उस समय टीम के सदस्य सार्वजनिक स्थानों को साफ करने में जुटे रहते हैं। कहीं प्लास्टिक और कागज दिखाई देते हैं, तो कहीं खाने-पीने की चीजों का बचा हुआ कचरा और अन्य अपशिष्ट जमा मिलता है। सफाई के बाद इन स्थानों का स्वरूप बदलता दिखाई देता है।इस अभियान का उद्देश्य केवल कुछ दिनों तक सफाई करना नहीं, बल्कि लोगों को यह समझाना भी है कि सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता की जिम्मेदारी केवल सफाईकर्मियों की नहीं है। जिस तरह हम अपने घर को साफ रखते हैं, उसी तरह सड़क, पार्क और आसपास के सार्वजनिक स्थानों को साफ रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।फाउंडेशन की ओर से चल रहा यह अभियान 2 अक्टूबर तक जारी रहेगा। टीम का प्रयास है कि सफाई के साथ लोगों में ऐसी आदत विकसित हो, जिससे अभियान खत्म होने के बाद भी इन स्थानों पर कचरा न फैले।क्योंकि स्वच्छ शहर की शुरुआत बड़े बदलाव से नहीं, बल्कि सुबह उठकर कचरा सही जगह डालने जैसी छोटी-सी जिम्मेदारी निभाने से होती है।

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