प्रकृति संरक्षण की सीख बचपन से, नन्हे हाथों ने मां के नाम पर लगाए पौधे
प्रकृति के संरक्षण की कोई उम्र नहीं होती, इसकी शुरुआत बचपन से ही की जा सकती है। बच्चों को अगर छोटी उम्र से ही पेड़-पौधों का महत्व समझाया जाए, तो वे न केवल खुद प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी पर्यावरण संरक्षण की सीख दे सकते हैं। सोमवार को भोपाल की सरदार वल्लभ भाई पटेल प्राथमिक शाला, भदभदा रोड में कुछ ऐसा ही प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जहां नन्हे हाथों ने पौधे लगाकर प्रकृति को सहेजने का संकल्प लिया।
डॉ. क्षमा धोड़पकर फाउंडेशन की ओर से चलाए जा रहे 108 दिवसीय पौधारोपण अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी माताओं के नाम पर पौधे लगाए। ‘एक पौधा मां के सम्मान और प्रकृति के संरक्षण के नाम’ की भावना के साथ बच्चों को समझाया गया कि पौधा लगाना केवल एक दिन का काम नहीं, बल्कि उसकी देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है। जिस तरह परिवार अपने बच्चों को प्यार और देखभाल से बड़ा करता है, उसी तरह पौधों को भी नियमित पानी, सुरक्षा और देखरेख की जरूरत होती है।
कार्यक्रम शाला के प्राचार्य श्री चम्पालाल चौरे के मुख्य आतिथ्य एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर शिक्षिका श्रीमती अंजलि सिंह ने अपनी माताजी श्रीमती सरोज सिंह, श्रीमती रेखा तिवारी ने अपनी माताजी श्रीमती गीता तिवारी और श्रीमती सीमा यादव ने अपनी माताजी श्रीमती शांति यादव के नाम पर पौधे लगाए।
वहीं विद्यार्थियों आरव पटेल, अनन्या शर्मा, कृष्णा लोधी और पलक साहू ने भी अपनी माताओं के नाम पर पौधारोपण कर अभियान में भागीदारी की। बच्चों की इस पहल ने मां के प्रति सम्मान को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ दिया।
कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट था कि पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े प्रयासों का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। एक छोटा पौधा लगाना, उसे नियमित पानी देना और बड़ा होने तक उसकी देखभाल करना भी प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का तरीका है। आज लगाए गए ये पौधे आने वाले वर्षों में छाया, हरियाली और स्वच्छ वातावरण देंगे। साथ ही, बच्चों को यह याद दिलाते रहेंगे कि धरती को हरा-भरा बनाने की जिम्मेदारी हर उम्र के व्यक्ति की है और इसकी शुरुआत अपने छोटे-छोटे प्रयासों से की जा सकती है।



