एक पेड़ माँ के नाम : माताओं के सम्मान के साथ पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
डॉ. क्षमा ढोड़पकर फाउंडेशन की ओर से “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत बैतूल और भोपाल में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान का उद्देश्य माताओं के सम्मान को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए लोगों को पौधारोपण के साथ-साथ पौधों की देखभाल के लिए भी प्रेरित करना है।
बैतूल के फाँसी खदान, पानी की टंकी के पास, मोती वार्ड, कोठी बाजार में ग्रीन टाइगर, बैतूल, हेर हेल्थ हॉस्पिटल, भोपाल एवं नर्मदा मिशन के संयुक्त तत्वावधान में पौधारोपण किया गया। पर्यावरण प्रेमियों ने अपनी माताओं के नाम पर पौधे लगाकर उनके संरक्षण का संकल्प लिया।
इस अवसर पर ओम प्रकाश दीवान ने माता जमना देवी दीवान, दिनेश के. सोनी ने स्व. माता कुसुम बाई सोनी, तरुण वैद्य ने माता प्रभावती वैद्य, नितेश यादव ने माता रेखा यादव, शारिक खान ने माता तसनीम आरा खान, सुखदेव कावड़कर ने माता मखु बाई कावड़कर, नितेश पिंटू परिहार ने स्व. माता सुशीला परिहार, सिराज खान ने स्व. माता रिहाना बी, आभा दीपक श्रीवास्तव ने स्व. माता रामबाई श्रीवास्तव तथा नरेन्द्र हरसुले ने माता बिंदिया हरसुले के नाम पर पौधारोपण किया।
वहीं डॉ. बंकिम बाथम, डॉ. भावना कावड़कर और श्री प्रशांत सराठे ने हेर हेल्थ हॉस्पिटल एवं नर्मदा मिशन की ओर से अपनी माताओं के सम्मान में पौधे लगाए।
भोपाल के जाटखेड़ी, वार्ड नंबर 52, हनुमान नगर स्थित पाटीदार कॉम्प्लेक्स में भी पौधारोपण कार्यक्रम हुआ। परम पूज्य अवधूत श्री दादागुरु भगवान जी के पावन आशीर्वाद से गुरु वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर श्री दीपक पाटीदार, श्री राकेश विश्वकर्मा, श्री वीरेंद्र पाटीदार, श्री गोपाल पाटीदार, श्री निखिल विश्वकर्मा, श्री निखिल पाटीदार, श्री कमल विश्वकर्मा एवं श्री मयंक पाटीदार ने अपनी-अपनी माताओं के सम्मान में पौधे लगाए।
अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि माँ जीवन का आधार हैं और पेड़-पौधे जीवन के संरक्षण का आधार। माँ के प्रति सम्मान और धरती के प्रति जिम्मेदारी को एक साथ जोड़ते हुए लगाया गया प्रत्येक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली और स्वच्छ पर्यावरण का संकल्प है।
परम पूज्य अवधूत श्री दादागुरु भगवान जी के पर्यावरण संरक्षण के संदेश से प्रेरणा लेते हुए अभियान का उद्देश्य पौधारोपण को जनभागीदारी से जोड़ना और लोगों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

